आज के परिवेश में केवल भगवान श्री कृष्ण ही मानव सभ्यता का भविष्य हो सकते है ? Featured

Written by  Aug 23, 2019

आज के दुख, संताप, द्वन्द, ईर्ष्या, द्वेष, और विविध संघर्षों  से भरे  परिवेश में केवल भगवान श्री कृष्ण ही मानव सभ्यता का भविष्य हो सकते है|

इस कृष्ण जन्माष्ठमी पर, भगवान श्री कृष्ण के व्यक्तित्व  को समझने से ज्यादा  मत्वपूर्ण कुछ नहीं हो सकता है|  ऐसा  कहा जाता है  कि कृष्ण अपने समय के कम से कम पांच हजार वर्ष पहले पैदा हुए। लेकिन भगवान कृष्ण  महत्व अतीत के लिए कम और आज के परिवेश,  वर्तमान समय और भविष्य के लिए ज्यादा है।

कृष्ण का व्यक्तित्व बहुत अनूठा है। अनूठेपन की पहली बात तो यह है कि कृष्ण हुए तो अतीत में, लेकिन हैं भविष्य के। अभी भी कृष्ण मनुष्य की समझ से बाहर हैं। भविष्य में ही यह संभव हो पाएगा कि कृष्ण को हम समझ पाएं। इसके कुछ कारण हैं।

सबसे बड़ा कारण तो यह है कि कृष्ण अकेले ही ऐसे व्यक्ति हैं जो धर्म की परम गहराइयों और ऊंचाइयों पर होकर भी गंभीर नहीं हैं, उदास नहीं हैं, रोते हुए नहीं हैं। कृष्ण अकेले ही नाचते हुए व्यक्ति हैं। हंसते हुए, गीत गाते हुए। अतीत का सारा धर्म दुखवादी था। कृष्ण को छोड़ दें तो अतीत का सारा धर्म उदास, आंसुओं से भरा हुआ था।

कृष्ण को कभी विचलित नहीं देखा है। उदास नहीं देखा है। कृष्ण की बांसुरी से कभी दुख का स्वर निकलते नहीं देखा है। कृष्ण सदा ताजे हैं।

जीसस के संबंध में कहा जाता है कि वह कभी हंसे नहीं। महावीर या बुद्ध भी  बहुत गहरे अर्थों में इस जीवन के विरोधी हैं। कोई और जीवन है परलोक में, कोई मोक्ष है, उसके पक्षपाती हैं। समस्त धर्मों ने दो हिस्से कर रखे हैं जीवन के---------एक वह जो स्वीकार योग्य है और एक वह जो इनकार के योग्य है।

कृष्ण अकेले ही इस समग्र जीवन को पूरा स्वीकार (Totality acceptability) कर लेते हैं। जीवन की समग्रता की स्वीकृति (Total acceptability)  उनके व्यक्तित्व में फलित हुई है। इसलिए, इस देश ने और सभी अवतारों को आंशिक अवतार कहा है, कृष्ण को पूर्ण अवतार कहा है। राम भी अंश ही हैं परमात्मा के, लेकिन कृष्ण पूरे ही परमात्मा हैं। और यह कहने का, यह सोचने का, ऐसा समझने का कारण है। और वह कारण यह है कि कृष्ण ने सभी कुछ आत्मसात कर लिया है।

इस संदर्भ में यह समझ लेना उचित होगा कि राम के जीवन को हम चरित्र कहते हैं। राम बड़े गंभीर हैं। उनका जीवन लीला नहीं है, चरित्र ही है। लेकिन कृष्ण गंभीर नहीं हैं। कृष्ण का चरित्र नहीं है वह, कृष्ण की लीला है। राम मर्यादाओं में बंधे हुए व्यक्ति हैं, मर्यादाओं के बाहर वे एक कदम न बढ़ेंगे। मर्यादा पर वे सब कुर्बान कर देंगे। कृष्ण के जीवन में मर्यादा जैसी कोई चीज ही नहीं है... अमर्याद... पूर्ण स्वतंत्र।

वे अकेले दुख के एक महासागर में नाचते हुए एक छोटे-से द्वीप हैं। या ऐसा हम समझें कि उदास, निषेध, दमन और निंदा के बड़े मरुस्थल में एक बहुत छोटे-से नाचते हुए मरूद्यान हैं।

कृष्ण अकेले हैं जो शरीर को उसकी समस्तता (in all dimensions) में स्वीकार कर लेते हैं, उसकी 'टोटलिटी" में। यह एक आयाम में नहीं, सभी आयाम में सच है।

 शायद कृष्ण को छोड़कर... पूरे मनुष्यता के इतिहास में, जिसके बाबत यह कहा जाता है कि वह जन्म लेते से हंसा। सभी बच्चे रोते हैं। एक बच्चा सिर्फ मनुष्य-जाति के इतिहास में जन्म लेकर हंसा। यह सूचक है। इस बात का जीवन एक लीला है इसमें कुछ भी उदास और निषेध करने योग्य नहीं है इसलिए जीवन को उसकी पूर्णता में स्वीकार करो तभी  इस पृथ्वी पर हंसती हुई मानवता का जन्म हो सकता है और कृष्ण तो केवल हंसती हुई मनुष्यता के संवाहक है।

मनुष्य जाति के इतिहास में कृष्ण अकेले हैं जो दमनवादी नहीं हैं। वे जीवन के सब रंगों को स्वीकार कर लिए हैं।

  1. वे प्रेम से भागते नहीं। वे पुरुष होकर स्त्री से पलायन नहीं करते।
  2. वे परमात्मा को अनुभव करते हुए युद्ध से विमुख नहीं होते।
  3. वे करुणा और प्रेम से भरे होते हुए भी युद्ध में लड़ने की सामर्थ्य रखते हैं।
  4. अहिंसक-चित्त है उनका, फिर भी हिंसा के ठेठ दावानल में उतर जाते हैं।
  5. अमृत की स्वीकृति हैं उन्हें, लेकिन जहर से कोई भय भी नहीं है।

कृष्ण इस पृथ्वी के पूरे जीवन को पूरा ही स्वीकार करते है । वे किसी परलोक में जीने वाले व्यक्ति नहीं, इस पृथ्वी पर, इसी लोक  में जीनेवाले व्यक्ति हैं । कृष्ण कभी भी बूढ़े नहीं होते, वे सदा तरोताजा हैं।

मनुष्य के मन ने सदा चाहा कि वह चुनाव कर ले। उसने चाहा कि स्वर्ग को बचा ले और नर्क को छोड़ दे। उसने चाहा कि शांति को बचा ले, तनाव को छोड़ दे। उसने चाहा शुभ को बचा ले, अशुभ को छोड़ दे। उसने चाहा प्रकाश ही प्रकाश रहे, अंधकार न रह जाए। मनुष्य के मन ने अस्तित्व को दो हिस्सों में तोड़कर एक हिस्से का चुनाव किया और दूसरे का इनकार किया। इससे द्वंद्व पैदा हुआ, इससे द्वैत हुआ।

कृष्ण दोनों को एक-साथ स्वीकार करने के प्रतीक हैं। जो दोनों को एक-साथ स्वीकार करता है, वही पूर्ण हो सकता है। कृष्ण मानव चेतना की संपूर्णता का प्रतीक है... उसके संपूर्ण व्यक्तित्व का तरल प्रतिबिंब।

अभी तक हम सोच नहीं सकते कि धार्मिक आदमी के ओठों पर बांसुरी कैसे है। अभी तक हम सोच ही नहीं सकते हैं कि धार्मिक आदमी और मोर का पंख लगाकर नाच कैसे रहा है। धार्मिक आदमी प्रेम कैसे कर सकता है, गीत कैसे गा सकता है। धार्मिक आदमी का हमारे मन में खयाल ही यह है कि जो जीवन को छोड़ रहा है, त्याग रहा है, उसके ओंठों से गीत नहीं उठ सकते, उसके ओंठ से दुख की आह उठ सकती है। उसके ओंठों पर बांसुरी नहीं हो सकती है।

यह असंभव है। इसलिए कृष्ण को समझना अतीत में बहुत ही असंभव हुआ। कृष्ण को समझा नहीं जा सका। इसलिए कृष्ण बहुत ही बेमानी, अतीत के संदर्भ में बहुत "एब्सर्ड', असंगत थे। भविष्य के संदर्भ में कृष्ण रोज संगत होते चले जाएंगे। और ऐसा धर्म पृथ्वी पर अब शीघ्र ही पैदा हो जाएगा जो नाच सकता है, गा सकता है, खुश हो सकता है। अतीत का समस्त धर्म रोता हुआ, उदास, हारा हुआ, थका हुआ, पलायनवादी, "एस्केपिस्ट' है। भविष्य का धर्म जीवन को, जीवन के रस को स्वीकार करने वाला, आनंद से, अनुग्रह से नाचने वाला, हंसने वाला धर्म होने वाला है।

इसलिए मैं कहता हूं, आज के परिवेश में केवल भगवान श्री कृष्ण ही मानव सभ्यता का भविष्य हो सकते है|

 

दिनेश यादव

MHRM, LLB, DIPM, PGDCA

एक स्वस्थ समाज के निर्माण में सहयोगी

Email ID: This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it.

Last modified on Friday, 23 August 2019 20:22

 

 

Featured Videos

  1. Popular
  2. Trending
  3. Comments

Calender

« September 2019 »
Mon Tue Wed Thu Fri Sat Sun
            1
2 3 4 5 6 7 8
9 10 11 12 13 14 15
16 17 18 19 20 21 22
23 24 25 26 27 28 29
30            

Twitter Feed

Desh Videsh
https://t.co/CIMQ0gpojD - Official Trailer: Sonu Ke Titu Ki Sweety | Luv Ranjan | Kartik Aaryan, Nushrat Bharucha,… https://t.co/yG6zGQNqle
Desh Videsh
Guardians of the Galaxy director James Gunn defends Chris Pratt after controversial tweet https://t.co/SiFIvSHKFy
Desh Videsh
The Steps to Spiritual Growth: Mind, Body, Soul https://t.co/zdiQTpRvt8
Desh Videsh
How to Create and Maintain a Balcony Garden in your Apartment https://t.co/kgauRgJgVP
Desh Videsh
Why we should get early in the morning... https://t.co/TpjwUMoTPy
Desh Videsh
5 Things That Happen to Your Body When You Quit Exercising for a Month https://t.co/rKAFrjAkEB
Desh Videsh
Power Yoga And its Benefits for a better physical and mental health https://t.co/Puydr8LT6L
Desh Videsh
Vinod Pandita PMC Guru Master Class https://t.co/YIxPjgwWy5
Desh Videsh
Takeaways from Business Leadership Master Class by Vinod K Pandita https://t.co/XgrHVDn9D4
Follow Desh Videsh on Twitter